शहादत पर सियासत क्यों?
गुरुवार, 26 नवंबर 2009
पूरा देश 26/11 हमले की बरसी मनाया। मुंबई में मारे गए 164 लोगों को नम आंखों से ऋद्धांजलि दी गई। हमलों में मारे गए लोगों की याद में गुरुवार को लोकसभा में दो मिनट का मौन रखा गया और प्रस्ताव पारित कर सरकार से कहा गया कि वह आतंकवाद के खात्मे के लिए सभी जरूरी कदम उठाए।
वहीं 26/11 मुंबई हमले में एक शहीद की पत्नी अगर दिल्ली आकर सरकार से गुहार लगाती है कि उसे अभी तक मुआवजा नहीं मिल पाया है। क्या ये सरकार के लिए शर्मनाक बात नहीं है? अगर विपक्ष इस मुद्दे को उठाता है तो सरकार उसे राजनीति की दुहाई देती है। आखिर क्यों?
लोकसभा में बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने मुंबई हमले के शिकार हुए लोगों के परिजनों के मुआवजे का सवाल लोकसभा में उठाया। केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए आडवाणी ने कहा कि एक शहीद की विधवा दिल्ली आकर मुआवजा न मिलने की शिकायत करती है। सरकार को पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की कोशिश तेज करनी चाहिए।
अपने नेता का इशारा पाकर लोकसभा में बीजेपी सांसदों ने हंगामा मचाना शुरू कर दिया। अनंत कुमार ने बीच में बोलना शुरू कर दिया। स्पीकर उन्हें रोकती रही लेकिन अनंत कुमार लगातार मुआवजे के सवाल पर सरकार पर निशाना साधते रहे।
इसके बाद वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी भड़क गए। उन्होंने बीजेपी को चेतावनी दी कि वो मुंबई हमले के शिकार लोगों के नाम पर सियासत न करें। प्रणब ने तो यहां तक कह डाला कि अगर इसी तरह राजनीति चलती रही तो कोई बड़ी बात नहीं देश पर फिर हमला हो जाए।
वहीं पूर्व बीजेपी सांसद किरीट सोमैया को मुंबई में मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए गिरफ्तार किया गया। वो 26/11 हमले के पीड़ितों को मुआवजा हो रही देरी को लेकर भूख-हड़ताल पर बैठे थे।
आखिर में एक ही सवाल क्या सरकार इस मामले को उतनी गंभीर नहीं है या फिर विपक्ष इतना कमजोर है कि वो सरकार पर दबाव नहीं बना पाती?
