‘कसाब शैतान का नुमाइंदा है’
मंगलवार, 4 मई 2010मुंबई हमले के गुनहगार पाकिस्तानी आतंकवादी आमिर अजमल कसाब की जिंदगी और मौत का फैसला चंद घंटों बाद हो जाएगा। सरकारी वकील उज्जवल निकम की मानें तो कसाब पर नरमी बरतना भारी गलती होगी। निकम तो एक ही रट लगा रहे हैं कि कसाब को फांसी की सजा दी जाए। अदालत में अपनी दलील रखते हुए निकम ने कसाब को शैतान का नुमाइंदा और किलिंग मशीन तक करार दिया।
दरअसल मुंबई पर 26/11 के आतंकी हमलों को अंजाम देने के सभी आरोपों में दोषी ठहराए गए पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब को अभियोजन पक्ष के वकील उज्जवल निकम ने 'शैतान का नुमाइंदा' और 'हत्या की मशीन' करार दिया।
निकम की मानें तो "कसाब के लिए अधिकतम सजा मृत्युदंड और न्यूनतम आजीवन कारावास है।"
निकम ने कहा, "मैं कसाब के लिए सजा-ए-मौत चाहूंगा। यह बदले की भावना नहीं है और न ही हम बर्बर न्याय चाहते हैं। बल्कि न्याय मिलना चाहिए।"
कसाब के मामले में निकम ने कहा यह सिर्फ लोगों की हत्या का मामला नहीं है बल्कि जिस बर्बर तरीके से इसे अंजाम दिया गया उसने समाज के सामूहिक चेतना को हिलाकर रख दिया।
उन्होंने कहा कि कसाब ने लोगों की केवल हत्या ही नहीं की बल्कि इस कृत्य का मजा भी ले रहा था। यह उसके अनैतिक व्यवहार और मानव जीवन की पूर्ण उपेक्षा को दर्शाता है।
वकील ने कसाब आदमी के वेष में जहरीला सांप है जो बार-बार काटना चाहता है। इसकी तुलना किसी से करना गलत होगा। ये मानवता के नाम पर कलंक है।
दरअसल 26 नवंबर 2008 की रात जब वह छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पहुंचा तो ज्यादा भीड़ न देखकर दुखी हो गया।
उन्होंने कहा कि कसाब और उसका सहयोगी अबू इस्माइल ज्यादा से ज्यादा लोगों को मारना चाहते थे लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हुई। इसलिए वह दुखी हो गए थे। यह उनके अंदर 'पशु की भावना' को प्रदर्शित करती है।
मालूम हो कि 26 नवंबर, 2008 की रात पाकिस्तान से आए 10 आतंकवादियों ने मुंबई के विभिन्न स्थानों पर हमला बोला था। लगभग 60 घंटे तक इन आतंकवादियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच चले संघर्ष में 166 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 244 घायल हो गए थे।
