मंत्रियों को लालबत्ती में जनता घुमाती है
रविवार, 17 मई 2009Posted by
media.face
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लालबत्तियों में घुमने वाले डेढ़ दर्जन से अधिक मंत्रियों को इस लोकसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है। केंद्रीय ऊर्वरक और रसायन मंत्री रामविलास पासवान जैसे दिग्गज चुनाव हार गए।
पासवान ने बिहार के हाजीपुर से लोकसभा का चुनाव एक दफा साढ़े चार लाख से अधिक मतों से जीतकर कीर्तिमान स्थापित किया था लेकिन इस बार वह अपनी परम्परागत सीट भी नहीं बचा सके। उनकी पार्टी का तो बिहार से सूपड़ा ही साफ हो गया।
चुनाव हारने वाले मंत्रियों में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ए. आर. अंतुले, कपड़ा मंत्री शंकरसिंह बाघेला, भारी उद्योग मंत्री संतोष मोहन देव, पंचायती राज मंत्री मणिशंकर अय्यर, महिला व बाल विकास मंत्री रेणुका चौधरी, रेल राज्यमंत्री नारनभाई राठवा, गृह राज्यमंत्री शकील अहमद, कृषि राज्यमंत्री तसलीमुद्दीन, मानव संसाधन राज्यमंत्री अली. अशरफ फातमी, पर्यटन राज्य मंत्री कांति सिंह, जल संसाधन राज्यमंत्री जयप्रकाश नारायण यादव, कृषि राज्यमंत्री अखिलेश प्रसाद सिंह, पेट्रोलियम राज्यमंत्री दिनशॉ पटेल, भारी उद्योग राज्यमंत्री रघुनाथ झा, जनजातीय मामलों के राज्यमंत्री रामेश्वर ऊरांव, सूचना व प्रसारण राज्यमंत्री एम. एच. अंबरीश और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री चंद्रशेखर साहू शामिल हैं।
रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने सारण और पाटलिपुत्र से चुनाव लड़ा था। सारण से तो वह जीत गए लेकिन पाटलीपुत्र सीट नहीं बचा सके। गृह मंत्री पी. चिदम्बरम पहले तो हार ही गए थे लेकिन पुनर्मतगणना के बाद वह जीते।
जनता के जनादेश ने इन मंत्रियों से लालबत्ती छीन ली है। इन मंत्रियों ने भले ही अपने-अपने विभाग की जिम्मेदारी अच्छे से निभाई हो लेकिन कहीं न कहीं वे अपने क्षेत्र की जनता को खुश नहीं रख पाए। इतनी भारी संख्या में मंत्रियों का हारना भी अपने आप में बहुत कुछ बयां करता है।
पासवान ने बिहार के हाजीपुर से लोकसभा का चुनाव एक दफा साढ़े चार लाख से अधिक मतों से जीतकर कीर्तिमान स्थापित किया था लेकिन इस बार वह अपनी परम्परागत सीट भी नहीं बचा सके। उनकी पार्टी का तो बिहार से सूपड़ा ही साफ हो गया।
चुनाव हारने वाले मंत्रियों में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ए. आर. अंतुले, कपड़ा मंत्री शंकरसिंह बाघेला, भारी उद्योग मंत्री संतोष मोहन देव, पंचायती राज मंत्री मणिशंकर अय्यर, महिला व बाल विकास मंत्री रेणुका चौधरी, रेल राज्यमंत्री नारनभाई राठवा, गृह राज्यमंत्री शकील अहमद, कृषि राज्यमंत्री तसलीमुद्दीन, मानव संसाधन राज्यमंत्री अली. अशरफ फातमी, पर्यटन राज्य मंत्री कांति सिंह, जल संसाधन राज्यमंत्री जयप्रकाश नारायण यादव, कृषि राज्यमंत्री अखिलेश प्रसाद सिंह, पेट्रोलियम राज्यमंत्री दिनशॉ पटेल, भारी उद्योग राज्यमंत्री रघुनाथ झा, जनजातीय मामलों के राज्यमंत्री रामेश्वर ऊरांव, सूचना व प्रसारण राज्यमंत्री एम. एच. अंबरीश और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री चंद्रशेखर साहू शामिल हैं।
रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने सारण और पाटलिपुत्र से चुनाव लड़ा था। सारण से तो वह जीत गए लेकिन पाटलीपुत्र सीट नहीं बचा सके। गृह मंत्री पी. चिदम्बरम पहले तो हार ही गए थे लेकिन पुनर्मतगणना के बाद वह जीते।
जनता के जनादेश ने इन मंत्रियों से लालबत्ती छीन ली है। इन मंत्रियों ने भले ही अपने-अपने विभाग की जिम्मेदारी अच्छे से निभाई हो लेकिन कहीं न कहीं वे अपने क्षेत्र की जनता को खुश नहीं रख पाए। इतनी भारी संख्या में मंत्रियों का हारना भी अपने आप में बहुत कुछ बयां करता है।
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