सहवाग रिचर्ड्स से आगे!

बुधवार, 16 दिसंबर 2009


80 के दशक में विवियन रिचर्ड्स का खौफ इस कदर था कि उन्हें सबसे विस्फोटक बल्लेबाज का रुतबा हासिल था। आज वही रुतबा वीरेंद्र सहवाग को मिला चुका है। ऐसे में एक सवाल ये उठता है कि विव बड़े या वीरू?

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और सहवाग के शुरुआती मार्गदर्शक सौरव गांगुली ने बेबाक अंदाज में एक बार फिर से कह डाला कि सहवाग को अब भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबा रास्ता तय करना है। खुद सहवाग भी अपने पूर्व कप्तान की राय से इत्तेफाक रखते हैं।

लेकिन, इतना तय है कि जिस तरह से सचिन तेंदुलकर को भारत के बाहर कभी भी क्रिकेट जगत सर डॉन ब्रैडमैन से बेहतर नहीं मानेगा ठीक उसी तरह सहवाग को भारत से बाहर शायद विव रिचर्ड्स से बेहतर नहीं माना जाएगा। सर्वकालीन महान खिलाड़ी से तुलना होना ही अपने आप में एक अनोखी बात है। आखिर, तेंदुलकर की महानता लारा, पोंटिंग, हेडेन या फिर गिलक्रिस्ट से तभी अलग हुई जब खुद डॉन ने उनके खेल में अपनी शैली की झलक देखी।

ऐसे में अगर सहवाग की असाधारण आक्रामकता में किंग रिचर्ड्स की झलक मिलती है तो इससे अच्छी तारीफ और क्या होगी? वनडे क्रिकेट में सहवाग रिचर्ड्स के करीब तो क्या टेस्ट क्रिकेट में खुद की ही साख के करीब नहीं पहुंच पाते।
रिचर्ड्स ने पूरे करियर के दौरान 187 वनडे खेले और मिडिल-ओवर्स में बल्लेबाजी की। इस दौरान दोनों सहवाग के नाम 8 तो रिचर्ड्स के नाम 11 शतक है। हालांकि अर्धशतक में ये फासला 17 का है। रिचर्ड्स के नाम 45 और सहवाग के नाम 28 है। स्ट्राइक रेट में सहवाग का पलड़ा भारी है लेकिन हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि रिचर्ड्स ने ना तो कभी 'सर्किल' और न ही 'पावर-प्ले में बल्लेबाजी की। सबसे अहम अंतर दोनों बल्लेबाजों के बीच 16 की औसत का है।

ज़ाहिर सी बात है वनडे क्रिकेट में सहवाग रिचर्ड्स के करीब तो क्या अपने समकालीन धुरंधरों में से तेंदुलकर, गांगुली और जयसूर्या के भी पास नहीं पहुंचते हैं। ऐसे में खुद को रिचर्ड्स की श्रेणी में लाने के लिए सहवाग को राजकोट जैसी कई पारियां खेलनी होगी। वनडे में अगर विवयन रिचर्ड्स के आंकड़े बेहतर हो तो टेस्ट में बाजी सहवाग मार लेते है। ये तो सब मानते है कि नजफगढ़ के नवाब में सर विवयन रिचर्ड्स की झलक मिलती है। लेकिन क्या वीरू की लंबी चौड़ी टेस्ट पारियां उन्हें रिचडर्स से बेहतर बनाती है?

अगर 72 टेस्ट मैच के आंकड़ों को देखें रिचर्ड्स और सहवाग के औसत 3 का फर्क है। लेकिन स्टाइक रेट मतलब हर सौ गेंद पर ज़्यादा रन बनाने के माल में सहवाग और रिचड्स के बीच करीब 10 अंक का फर्क है। इसका साफ मतलब है कि सहवाग रिचडर्स से ज़्यादा तेज़ी से रन जुटाते हैं। यही नहीं 72 मैचों तक रिचर्ड्स नाम 150 से ज़्यादा रनों वाली सिर्फ 6 पारियां थी, जबकि सहवाग के नाम ये संख्या दुगुनी है। शतक के मामले में इस दौरान रिचर्ड्स सिर्फ सहवाग से 1 अंक से बेहतर हैं।

अगर 5000 टेस्ट रन बनाने के पैमाने को आधार मानें तो सिर्फ कपिल देव और ऐडम गिलक्रिस्ट का स्ट्राइक सहवाग से बेहतर है। लेकिन ये दोनों खिलाड़ी मुख्य बल्लेबाज़ होने के बजाए अपने टीम के लिए ऑल-राउंडर थे औऱ 7वें नम्बर पर बल्लेबाज़ी करते थे।

मौजूदा पीढ़ी में भले ही लोगों को विवियन रिचर्ड्स के आंकड़े ज़ुबा पर नही हों लेकिन उनका नाम आते ही हर किसी को उनके खौफ, दबदबे और महानता का एहसास तुंरत हो जाता है। आने वाली पीढ़ी भी अगर सहवाग के रिटायरमेंट के बाद उनके आंकड़ों की बजाए सिर्फ उनके नाम से ही रोमांचित हो उठे और वाह करने लगे तो कोई हैरान नहीं होगा। और ये कमाल रिचर्ड्स का कोई सच्चा उत्तराधिकारी ही कर सकता था।

0 टिप्पणियाँ: