आडवाणी को बीजेपी और संघ ने हरवाया

रविवार, 7 जून 2009

मजबूत नेता, निर्णायक सरकार...फिर भी करारी हार। हार का पोस्टमार्टम, रिपोर्ट गायब। रुठना, मनाना और फिर हिम्मत जुटाना। जां हां, लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद बीजेपी में घमासान छिड़ गया। जहजाहिर हुआ कि पार्टी के अंदर सबकुछ ठीक नहीं था। कई दौर की बैठकें हुई हार की कारणों पर चर्चा हुई। लेकिन किसी ने खुलकर एक कारण नहीं बताने की हिम्मत जुटा पाई। आखिर अपने तो अपने होते हैं।
लोहपुरुष लालकृष्ण आडवाणी के सलाहकार सुधींद्र कुलकर्णी ने पार्टी के खिलाफ बोलने की हिम्मत जुटा ली। और सुधींद्र कुलकर्णी के बयान से बीजेपी में खलबली है।
टीम आडवाणी के सलाहकार सुधींद्र कुलकर्णी ने बीजेपी की हार की पर्त दर पर्त उधेड़ दी। सुधींद्र कुलकर्णी ने दो कदम आगे बढ़ाते हुए बीजेपी के नेतृत्व पर ही खुला हमला बोल दिया है। सुधींद्र ने ब्लॉग में ये लिखकर सनसनी फैला दी है कि चुनावों में आडवाणी अकेले पड़ गए थे। उन्हें खुद बीजेपी और संघ परिवार ने ही कमजोर दिखा दिया। अटल बिहारी बाजपेयी के साथ आडवाणी ख़डे रहे मगर जब आडवाणी की बारी आई तो तस्वीर बदल चुकी थी।
सुधींद्र ने लिखा है कि 'कैसी विडंबना है। सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल मनमोहन सिंह के साथ इतने मजबूती से खड़े रहे कि एक कमजोर पीएम मजबूत बन गया। जबकि बीजेपी और संघ परिवार ने आडवाणी जैसे मजबूत नेता को कमजोर और लाचार दिखा दिया। पार्टी के कई कार्यकर्ताओं ने अपना दुख इस तरीके से बयां किया कि अटल जी पीएम बनने में इसलिए सफल रहे क्योंकि उसके साथ आडवाणी पूरी निष्ठा और ईमानदारी से खड़े रहे मगर इस बार आडवाणी जी के साथ उसी तरीके से काम करने वाला कोई आडवाणी नहीं था।'
सुधींद्र कुलकर्णी ने तो बीजेपी के हिंदुत्व पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। सुधींद्र के मुताबिक बीजेपी के भीतर विचारधारा को लेकर द्वंद है और ऐसे में पार्टी मुस्लिम और ईसाई की बात तो दूर खुद हिंदुओं के एक बड़े तबके का ही समर्थन हासिल नहीं कर सकती।
दरअसल सुधींद्र कुलकर्णी बीजेपी की हार के लिए पार्टी की नीति और विचारधारा पर सीधा वार कर रहे हैं। उन्होंने बीजेपी और संघ परिवार की मुस्लिम समाज के प्रति अपनाई जा रही नीतियों पर भी करारा वार किया। पार्टी मुस्लिमों के मुद्दे को लेकर बुरी तरह कंफ्यूज्ड है। बीजेपी का सच्चर कमेटी रिपोर्ट को पूरी तरह से दरकिनार करना एक बहुत बड़ी भूल थी। कांग्रेस ने अपने फायदे के लिए इसका गठन किया मगर बीजेपी उसमें कमिंया ही ढूंढती रह गई जबकि उसे इस रिपोर्ट के बहाने मुस्लमों के हित में खड़ी हुई दिखना चाहिए था।
हालांकि सुधींद्र कुलकर्णी खुद ही बीजेपी की चुनावी रणनीति के जिम्मेदार थे लेकिन हैरत की बात ये है कि अव वे उसी रणनीति को कटघरे में खड़ा कर हे हैं। उनके मुताबिक बीजेपी पूरे चुनाव के दौरान यूपीए सरकार की कमियां गिनाने में ही उलझी रही। यहां तक कि सुरक्षा का मुद्दा जो बीजेपी का मजबूत एजेंडा हो सकता था, वहां भी बीजेपी बुरी तरह लड़खड़ा गई। हुआ कुछ यूं कि कांग्रेस ने कंधार एपिसोड भुनाकर बीजेपी को हाशिए पर डाल दिया मगर बीजेपी चुनाव का एजेंडा भी तय नहीं कर सकी।
सुधीन्द्र कुलकर्णी के इस लेख के बाद बीजेपी सकते में है। पार्टी नेताओं की जुबान पर ताला लगा हुआ है और पार्टी के नेता कुलकर्णी के उठाए सवालों से कन्नी काट रहे हैं। ज़ाहिर सी बात है की कोई भी इस कड़वे सच को खुलकर स्वीकारने का साहस नहीं जुटा पा रहा है।
सुधीन्द्र कुलकर्णी के लेख की हकीकत को बीजेपी का एक बड़ा तबका बहुत पहले से महसूस कर रहा है। इससे पहले बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण जेटली और सांसद प्रभात झा ने भी अपने लेखों में पार्टी की कमियों की तरफ इशारा किया था। मगर कुलकर्णी की तरह खुलकर बोलने का साहस कोई नहीं कर पाया।

फेडरर बने फ्रेंच ओपन के सरताज

विश्व के दूसरी वरीयता प्राप्त टेनिस खिलाड़ी स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर ने साल के दूसरे ग्रैंड स्लैम फ्रेंच ओपन के फाइनल में रविवार को स्वीडन के रोबिन सोडरलिंग को हराकर टेनिस के इतिहास में चारों ग्रैंड स्लैम खिताब अपने नाम कर लिया है। ये कारनाम करनेवाले फेडरर विश्व के छठे खिलाड़ी हो गए हैं।
फेडरर ने फाइनल में सोडरलिंग को 6-1, 7-6, 6-4 से हराया। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका के पीट सैंप्रास के सर्वाधिक ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने के रिकार्ड की बराबरी कर ली।
सेमीफाइनल मुकाबले में फेडरर ने अर्जेटीना के जुआन डेल पोत्रो को 3-6, 7-6, 2-6, 6-1, 6-4 से मात दी थी।
विश्व के महानतम टेनिस खिलाड़ियों में शुमार सैंप्रास ने अपने टेनिस करियर के दौरान कुल 14 ग्रैंड स्लैम एकल खिताब जीते थे। अब फेडरर के नाम भी 14 खिताब दर्ज हो गए।
हालांकि फेडरर के लिए 2008 अच्छा नहीं रहा था। इस साल स्पेन के राफेल नडाल ने उन्हें सिर्फ एक ग्रैंड स्लैम (अमेरिकी ओपन) जीतने दिया था।
इस बार नडाल क्वॉर्टर फाइनल मुकाबले में ही बाहर हो चुके थे। लिहाजा इस बार फेडरर के पास सैंप्रास के रिकार्ड की बराबरी करने का सुनहरा अवसर था। नडाल को सोडरलिंग ने हराया था।

फेडरर अब साल के तीसरे ग्रैंड स्लैम विंबलडन का खिताब जीतकर सैंप्रास को पीछे भी छोड़ सकते हैं क्योंकि उन्हें ग्रास कोर्ट का बेताज बादशाह माना जाता है, जबकि नडाल क्लेकोर्ट पर ही अपने सर्वश्रेष्ठ फार्म में होते हैं।

लोभ में बिके बीवी, बच्चे और ईमान

बुधवार, 3 जून 2009


लालच बुरी बला है। ये कहावत तो आपने कई बार सुनी होगी। लेकिन लालच के चलते कोई अपने बच्चों को ही गिरवी रख दे ये शायद आपने नहीं सुना होगा।
एक का तीन गुना करने के चक्कर में एक औरत ने एक दो नहीं, अपने तीन बच्चों को गवां बैठीं। जी हां, हिंदुस्तान के सबसे बड़े नटवरलाल के एक के बदले तीन नोट के ऑफर के चक्कर में जयपुर के मदरामपुरा की इंद्रा देवी ने अपने तीन बच्चों को गिरवी रख दिया।
इंद्रा देवी ने लोगों से महाठग अशोक जडेजा के चमत्कार की कहानी सुन रखी थी। इंद्रा देवी भी एक लाख का तीन लाख पाने की कोशिश में जुट गई। इंद्रा ने एक लाख रुपयों के बदले अपने बच्चों को एक रिश्तेदार के पास गिरवी रखने का फैसला किया। करार के मुताबिक इंद्रा की दो बेटियां और तीन साल का एक बेटा उसके रिश्तेदार के पास रहेंगे। पैसा चुकाकर वो अपने बच्चों को ले जा सकेगी।
इसके बाद इंद्रा ने एक लाख रुपए तीन महीने के लिए अशोक जडेजा के हवाले कर दिए। लेकिन जब तय तारीख पर वो पैसे लेने पहुंचे तो जडेजा पैसे लेकर फरार हो चुका था। इसके बाद रिश्तेदार ने जिद पकड़ ली कि पहले पैसे लाओ तब बच्चे मिलेंगे।
अब वो किसी भी तरह अपने बच्चों को वापस पाना चाहती है। अब बड़ा सवाल ये है कि एक लाख रुपए कहां से आएंगे। पैसों के लालच में ममता को दांव पर लगाने वाली इंद्रा को अपने किए पर भारी पछतावा हो रहा है। वो हर हाल में अपने बच्चों से मिलना चाहती है, लेकिन उसके पास कोई चारा नहीं है।
अशोक जडेजा के मायाजाल में फंसकर अपनों को दांव पर लगाने वालों में सिर्फ इंद्रा ही नहीं है। जयपुर के मुहाना में रह रही एक महिला के मुताबिक उसे उसके पति ने पैसों की खातिर 50 हजार रुपयों में गिरवी रख दिया। करार के मुताबिक अगर तय वक्त तक रेखा का पति उधार नहीं चुकाया तो लेनदार रेखा को ले जाएंगे।

'घर घऱ से एक नौजवान चाहिए'

सोमवार, 1 जून 2009

पाकिस्तानी सेना की लगातार कार्रवाई से तालिबान बौखला गया है। पाक फौजें लगातार तालिबान के कब्जे वाले इलाकों को आजाद कराती जा रही हैं। इस लड़ाई में तालिबान के सैकड़ों लड़ाके मारे जा चुके हैं। ऐसे में तालिबान अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहा है।
तालिबान ने स्वात घाटी में एक नया फरमान जारी कर दिया है। तालिबान को अब हर घर से एक नौजवान की जरूरत है जो उसके लिए अपनी जान दे सके। तालिबान ने अपने इस नए फरमान में स्वात में रह रहे लोगों से कहा है कि अगर स्वात में रहना है तो हर घर से जिहाद के लिए एक नौजवान दे दिया जाए। तालिबान को ऐसे नौजवान चाहिए जो जेहाद के नाम पर खुद को मिटाने को तैयार हों।
दरअसल स्वात घाटी में तालिबान और पाकिस्तानी फौज में भीषण संघर्ष पिछले 35 दिनों से जारी है। पाकिस्तान का दावा है कि उसने तालिबान के सैकड़ों लड़ाकों को मार गिराया। एक-एक कर तालिबान के कब्जे वाले इलाकों पर पाकिस्तानी फौज का कब्जा होता जा रहा है। पाकिस्तान के सबसे अहम इलाके मिंगोरा से भी तालिबानियों को खदेड़ने का काम शुरू हो चुका है।
लेकिन आमने-सामने की जंग में हारते तालिबान ने अपने नापाक इरादों को अंजाम देने के मांग रहा है स्वात घाटी के हर घर से एक नौजवान। तालिबान के इस खूंखार इरादे को अंजाम दे रहा है मौलाना फजलुल्लाह। वहीं मौलाना फजलुल्लाह जिस पर 5 करोड़ का इनाम रखा गया है। मौलाना फजलुल्लाह जिंदा बम तैयार करने की बात बड़े गर्व से मानता है।
बच्चों को जिंदा बम के तौर पर इस्तेमाल करने वाला तालिबान अपने खतरनाक मंसूबों अंजाम देने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। फिर वो बच्चों को जिंदा बम में तब्दील करना हो या घाटी के हर घर से एक आदमी की मांग हो। इतना ही नहीं पाकिस्तानी फौज से बुरी तरह मार खाने वाले तालिबान ने पाकिस्तानी फौज के लड़ाकों के घर वालों को भी निशाना बनाने का आदेश दे दिया है।
ऐसे में अगर पाकिस्तान से जल्द से जल्द तालिबान का सफाया न किया गया तो आने वाले दिनों में हालात और बदतर हो सकते हैं। तालिबान की नौजवानों की ये मांग नई नहीं है। पहले भी तालिबानी आतंकी बच्चों को अपने संगठन में शामिल करते रहे हैं।

कब सुधरेगा श्रीशांत, अब रैना को दी गाली

गुरुवार, 21 मई 2009


क्या तेज गेंदबाज एस. श्रीशांत ने कभी न सुधरने की कसम खा ली है? बुधवार को चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ मैच में किंग्स-11 पंजाब के तेज गेंदबाज श्रीशांत अपना आपा खो बैठे। सुरेश रैना से चौका खाने के बाद श्रीशांत ने बौखलाकर गालियां दे दी। परंतु रैना ने संयम बरता और श्रीशांत से कहा कि उन्हें कुछ भी कह लें मगर गाली न दें।
ये पूरा वाकया स्टंप माइक्रोफोन पर रिकॉर्ड हुई थी। कमेंट्री बॉक्स में जब कमेंटेटर्स ने श्रीशांत की आवाज सुनी तो वो उनकी हरकत पर हैरान रह गए। उस वक्त कमेंट्री कर रहे सुनील गावस्कर ने पूरा वाकया दर्शकों को समझाया कि आखिर हुआ क्या था?
आईपीएल-2 में श्रीशांत ने दूसरी बार अपना गुस्सा दिखाया। इससे पहले IPL के अपने दूसरे मैच में ही श्रीशंत अपने रंग में लौट आए। श्रीशांत ने चेन्नई सुपर किंग्स के सलामी बल्लेबाज मैथ्यू हेडन पर गुस्सा दिखाया था। बाद में हेडन ने उन्हें ओवर रेटेड गेंदबाज कहा था। श्रीशांत की गुस्से की वजह थी हेडन की धमाकेदार पारी।
दरअसल पारी के आखिरी ओवर में श्रीशांत के गेंद पर हेडन ने एक दो नहीं पूरे तीन छक्के जड़ दिए। पांचवीं गेंद पर श्रीशांत ने चार रन लेग बाई के तौर पर भी दिए। श्रीशांत की बौखलाहट साफ देखी जा सकती थी। आखिरी गेंद पर श्रीशांत ने हेडन को आउट कर दिया और फिर हमेशा की तरह श्रीशांत बड़बड़ाते दिखाई दिए। लेकिन हेडन शांत हो कर बिना पलटे पवेलियन की ओर चल पड़े। हेडन ने अपना गुस्सा प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाया। उन्होंने कहा कि श्रीशांत ओवर रेटेड गेंदबाज हैं।
मालूम हो कि मैदान पर उलझना श्रीशांत की पुरानी आदत रही है। पिछले साल थप्पड़ विवाद आप नहीं भूले होंगे। जब हरभजन ने श्रीशांत को मैच के बाद जोरदार थप्पड़ जड़ दिया था। इस बार अनिफट होने के कारण शुरुआती मैचों से श्रीशांत बाहर थे। लेकिन मैदान पर जैसे ही आए अपनी पुरानी आदतों से बाज नहीं आए।

मंत्रियों को लालबत्ती में जनता घुमाती है

रविवार, 17 मई 2009


लालबत्तियों में घुमने वाले डेढ़ दर्जन से अधिक मंत्रियों को इस लोकसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है। केंद्रीय ऊर्वरक और रसायन मंत्री रामविलास पासवान जैसे दिग्गज चुनाव हार गए।
पासवान ने बिहार के हाजीपुर से लोकसभा का चुनाव एक दफा साढ़े चार लाख से अधिक मतों से जीतकर कीर्तिमान स्थापित किया था लेकिन इस बार वह अपनी परम्परागत सीट भी नहीं बचा सके। उनकी पार्टी का तो बिहार से सूपड़ा ही साफ हो गया।
चुनाव हारने वाले मंत्रियों में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ए. आर. अंतुले, कपड़ा मंत्री शंकरसिंह बाघेला, भारी उद्योग मंत्री संतोष मोहन देव, पंचायती राज मंत्री मणिशंकर अय्यर, महिला व बाल विकास मंत्री रेणुका चौधरी, रेल राज्यमंत्री नारनभाई राठवा, गृह राज्यमंत्री शकील अहमद, कृषि राज्यमंत्री तसलीमुद्दीन, मानव संसाधन राज्यमंत्री अली. अशरफ फातमी, पर्यटन राज्य मंत्री कांति सिंह, जल संसाधन राज्यमंत्री जयप्रकाश नारायण यादव, कृषि राज्यमंत्री अखिलेश प्रसाद सिंह, पेट्रोलियम राज्यमंत्री दिनशॉ पटेल, भारी उद्योग राज्यमंत्री रघुनाथ झा, जनजातीय मामलों के राज्यमंत्री रामेश्वर ऊरांव, सूचना व प्रसारण राज्यमंत्री एम. एच. अंबरीश और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री चंद्रशेखर साहू शामिल हैं।
रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने सारण और पाटलिपुत्र से चुनाव लड़ा था। सारण से तो वह जीत गए लेकिन पाटलीपुत्र सीट नहीं बचा सके। गृह मंत्री पी. चिदम्बरम पहले तो हार ही गए थे लेकिन पुनर्मतगणना के बाद वह जीते।
जनता के जनादेश ने इन मंत्रियों से लालबत्ती छीन ली है। इन मंत्रियों ने भले ही अपने-अपने विभाग की जिम्मेदारी अच्छे से निभाई हो लेकिन कहीं न कहीं वे अपने क्षेत्र की जनता को खुश नहीं रख पाए। इतनी भारी संख्या में मंत्रियों का हारना भी अपने आप में बहुत कुछ बयां करता है।

तीन देवियां के बीच टिकी सरकार की राह

गुरुवार, 14 मई 2009


अंतिम और पांचवें चरण के चुनाव संपन्न होते ही जोड़तोड़ का गणित शुरू हो गई है। मतगणना तो 16 मई को होगी लेकिन रूठने-मनाने का दौर शुरू हो गया है। देश की दो बड़ी पार्टियां बीजेपी और कांग्रेस जादूई आंकड़ा 272 को स्पर्श करने के लिए अन्य साथियों को अपने पाले में लेने के लिए कोशिश तेज कर दी हैं।
इस कड़ी में आज सोनिया गांधी के घर पर कांग्रेस महासचिवों की बैठक हो रही है। देर शाम को एक और कोर कमिटी की बैठक हो सकती है।
कांग्रेस को आंकड़े तक पहुंचने के लिए राजनीति की तीन देवियां यानी माया, जया और ममता का साथ चाहिए। ममता तो कांग्रेस के खेमे में शामिल हैं लेकिन माया और जया से अभी तक कांग्रेस की दूरी बनी हुई है। ये दूरी 16 मई तक रहेगी। 16 मई के बाद अगर ये तीनों देवियां कांग्रेस के साथ होंगी तो सत्ता में फिर से यूपीए काबिज हो सकता है। लेकिन वामदलों से कांग्रेस की नजदीकियां बढ़ते ही ममता से दूरियां बढ़ जाएगी।
पांचवें और अंतिम चरण के बाद आईबीएन7 और दैनिक भास्कर ने सीएसडीएस के साथ मिलकर वोटरों की नब्ज को टटोलने के लिए एक सर्वे किय़ा। सर्वे की मानें तो कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है। जबकि अगर यूपीए की बात करें तो यूपीए के खाते में 185 से 205 सीटें जाते दिख रही हैं।
इस आंकड़े को आधार मानकर चलें तो यूपीए को सरकार बनाने के लिए कुल 272 सीटें चाहिए यानी यूपीए को सत्ता में फिर से काबिज होने के लिए 67 से 87 सांसदों को अपने पाले में लेने होंगे।
अब ये सीटें कहां से आएंगीं इस पर एक नजर डालते हैं। तमिलनाडु में डीएमके यूपीए के साथ है लेकिन अगर एआईएडीएमके को चुनाव के बाद पलड़ा भारी होता है तो फिर क्या तस्वीर बनकर उभरेगी। फिलहाल तो कांग्रेस प्रवक्ता जयंती नटराजन की ओर से कहा जा रहा है कि कांग्रेस डीएमके से अपना समर्थन वापस नहीं लेगी।
अगर देश के सबसे बड़े राज्य य़ूपी की बात करें तो यहां सपा और कांग्रेस दोनों चुनाव मैदान में अलग-अलग हैं। लेकिन चुनाव के बाद दोनों को साथ आना दोनों की मजबूरी है। वैसे कांग्रेस सपा को बॉय-बॉय कर बीएसपी से हाथ मिलाने में भी नहीं हिचकेगी। क्योंकि सूबे में सपा की जमीन खिसकती नजर आ रही है। वहीं मायावती को बढ़त मिलने के आसार है। ऐसे में कांग्रेस सपा और बीएसपी दोनों में से किसी की भी सवारी कर सकती है। लेकिन मायावती की नजर तो पीएम की कुर्सी पर है। वहीं मुलायम का कहना है कि नतीजे आने पर ही आगे की रणनीति बनाएंगे। यानी खेल अभी बाकी है। लेकिन मैदान तैयार है।
अगर बिहार में लालू-पासवान की बात करें तो दोनों की राजनीतिक जमीन पर नीतीश ने दस्तक दे दी है। दोनों दबी जुबान यूपीए के साथ होने की बात करते हैं पर कांग्रेस की नजर तो नीतीश पर है। गाहे-बगाहे सोनिया-राहुल नीतीश के बखान करते रहते हैं। लेकिन नीतीश ने एनडीए के साथ ही रहने का भरोसा दिलाया है। ऐसे में कांग्रेस के लिए वहां लालू-पासवान को साथ लेना एक मजबूरी है।
वैसे, लालू यादव यादव का कहना है कि मीडिया में जो दिखाया जा रहा है वो सच नहीं है। वो 16 मई के बाद ही पटना से दिल्ली आएंगे और अपना पत्ता खोलेंगे।
बिहार से हटकर पश्चिम बंगाल पर नजर डालें तो वहां कांग्रेस के साथ ममता बनर्जी है। अगर कांग्रेस वाम दलों को साथ लेता है तो ममता से किनारा करना होगा। लेकिन वाम दल कांग्रेस से खफा हैं। वहीं उड़ीसा में बीजेडी पर कांग्रेस की नजर है। लेकिन सारा खेल 16 मई को ही शुरू होगा। सबकुछ चुनावी नतीजे पर निर्भर करेगा। कांग्रेस के लिए एक बड़ी समस्या ये है कि किस पार्टी की सवारी कर नैय्या पार की जाए। क्योंकि ये तो जोड़तोड़ की राजनीति है।